25 दिसंबर क्रिसमस डे को बड़ा दिन क्यों कहते है? 25 december christmas

Christmas Day Kyu manaya jata hai

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25 december christmas day 2020, Christmas Day Kyu manaya jata hai, 25 दिसंबर को बड़ा दिन क्यों मनाया जाता है, क्रिसमस डे को बड़ा दिन क्यों माना जाता है, इस लेख में हम आपको क्रिसमस डे के बारे में संपूर्ण जानकारी बताएंगे । 25 दिसंबर क्रिसमस डे को बड़ा दिन क्यों कहते है? आइए जानते हैं इसलिए के माध्यम से :-

25 December Christmas Day 2020

भारतवर्ष त्यौहारों का देश है। त्यौहारों का जीवन मे अलग अलग महत्व है। त्यौहार मनाने में दिन विशेष का महत्व बना रहता है। हमारा मनोरंजन होता है. सब लोग आपस में मिलते रहते हैं। त्यौहार पर सब लोग अपनी परेशानियाँ तथा आपसी व्देषों को भूलकर प्रसन्नता का अनुभव करते है। हम भारतवासी त्यौहारों से शक्ति ग्रहण करते हैं और फिर आनंद से कार्य में लग जाते है।

25 december christmas day 2020 क्रिसमस ईसाईयों का सबसे महत्वपूर्ण त्यौहार है । ईसाईयों के लिए क्रिसमस का महत्व और खुशी उतनी ही होती है जितनी हिंदुओं मे दीवाली के पर्व पर और ईद पर मुसलमानों में होती है। क्रिसमस प्यार और शांति का त्यौहार है और यह इंसान के जीवन को सुखी और सार्थक बनाने की सीख देता है।

ईसामसीह का परिचयः

Christmas Day Kyu manaya jata hai, ईसामसीह का जन्म मध्य एशिया के एक निर्धन परिवार में हुआ था। ईसामसीह ने ईसाई धर्म का प्रवर्तन किया। ईसा के जन्म के साथ 25 दिसंबर का दिन जुड़ा हुआ है। ईसामसीह का जीवन बहुत ही दुःखों और कष्टों से भरा हुआ है। ईसामसीह के जीवन में उदासी, बलिदान, कष्ट आदि से भरे है। समाज के लोगों ने उन पर बहुत सारे अन्याय किए, उनके जीवन का अन्त भी दुःखद हुआ।

ईसा के जन्म की कथाः

Story of Irsha in hindi इस कथा में कहा गया है कि ग्रैबियल ईश्वर की दूत ने मैरी को बताया कि वह ईश्वर के पुत्र को जन्म देगी। चूंकि मैरी एक कुंआरी, अविवाहित लड़की थी, इसलिए यह सब कैसे संभव होगा। ग्रैबियल ने कहा कि एक पवित्र आत्मा उसके पास आएगी और उसे ईश्वर की शक्ति प्रदान करेगी। जोसेफ और मैरी का विवाह हुआ। मैरी गर्भवती थी।

25 दिसंबर क्रिसमस डे को बड़ा दिन क्यों कहते है? 25 december christmas

नाजरथ में जोसेफ और मेरी रहा करते थे। तब नाजरथ रोमन साम्राज्य में था, पर प्रत्येक व्यक्ति को बैथेलहम जाकर अपना नाम लिखवाना जरुरी था, बैथेलहम में धर्मशालाएं, व सभी आवास गृह भरे हुए थे, इसलिए बैथेलहम में बड़ी संख्या में लोग थे। शरण के लिए जोसेफ मेरी को लेकर जगह-जगह भटकता रहा। जोसेफ को एक अस्तबल में जगह मिली उसने मेरी को वही एक चरनी में लिटाया कुछ गडरिये वहां भेड़ चरा रहे थे। वहीं आधी रात मे मेरी ने एक बालक को जन्म दिया, ईश्वर ने उसे यीशु का जन्म, आकाश में एक उज्जवल सितारे व्दारा संकेतित किया।

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गडरियों ने देखा की वह बालक कोई साधारण बालक नही था वे सभी घुटने टेक कर ईसा की स्तुति की और उन्होने ईसा को मसीहा स्वीकार कर लिया क्योंकि वे मानते हैं कि जीसस ईश्वर के पुत्र हैं। ईसाइयों के लिए यह दिन अत्यधिक महत्वपूर्ण है वे मानते है कि उस दिन ईश्वर का पुत्र सभी के कल्याण के लिए पृथ्वी पर आया था।

बड़ा दिन एक अन्तर्राष्ट्रीय पर्व हैः

25 दिसंबर को प्रतिवर्ष बड़ा दिन (क्रिसमस डे) मनाया जाता है। आज से 1997 वर्ष पूर्व 25 दिसंबर को ईसामसीह का जन्म हुआ था। बड़ा दिन का अर्थ है बहुत महत्व का दिन। बड़ा दिन विश्व के लगभग सभी देशों में मनाया जाता है। उन्हीं के जन्म दिन के रुप में बड़ा दिन दुनियाँ में चारों ओर बड़ी ही धुम-धाम से मनाया जाता है।

आज के दिन मरियम मैरी की गोदी में खेलते हुए बालक ईसा का स्मरण करते हैं। इसलिए हर भारतवासी 25 दिसंबर को बड़ा दिन कहते है। क्रिसमस डे दुनियाँ भर में ईसाई धर्म के मानने वालों व्दारा बड़े उल्लास एवं आदर के साथ मनाया जाता है। क्रिसमस डे को एक अन्तर्राष्ट्रीय पर्व कह सकते है।

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खुश होने और खुशी बाँटने का संदेश देता हैः

क्रिसमस डे पर गिरजाघरों (Churches) में प्रार्थनाएँ की जाती है। प्रातःकाल सब लोग गिरजाघरों में विश्व कल्याण के लिए प्रार्थना करते हैं, एक दूसरे को बधाइयाँ देते हैं। क्रिसमस ट्री बनाते है और घरों को सजाते है, तरह तरह के पकवान बनते है। विशेष रुप से केक बनाया जाता है। वातावरण बहुत ही हँसी-खुशी का होता है।

आज के दिन उपहारों का लेन देन किया जाता है मान्यता यह है कि क्रिसमस डे के अवसर पर बाबा संत क्लॉज बच्चों के लिए उपहार छोड़ जाते है।

ईसामसीह ने विश्व कल्याण के नाम पर सूली के ऊपर अपने आपको बलिदान कर दिया। यह दिन हमारे लिए शांति, प्रेम और सद्भभावना का संदेश लाता है। अतः क्रास सभी के लिए सेवा और त्याग का प्रतीक है।

ईसामसीह ने सभी को शांती और प्रेम का संदेश दिया है।“

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