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दक्षिण भारत में संगम युग का इतिहास की सम्पूर्ण जानकारी

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दक्षिण भारत में संगम युग का इतिहास (dakshin bhaarat mein sangam yug ka itihaas) आज के इस लेख में हम आपको sangam yug history in hindi के बारे में बात करेगे, जिससे अक्सर प्रतियोगी परीक्षा में प्रश्न पूछे जाते है| हम आप सभी को बता दे की, Sangam Yug ka Itihaas बहुत ही रोचक तथ्य है| आप सभी Students दक्षिण भारत में संगम युग का इतिहास की सम्पूर्ण जानकारी निचे दिए दिए गए लेख के माध्यम से विस्तार से पढ़े !!!

Sangam Yug ka Itihaas ki Jankari

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शब्द का प्रयोग भारत के कवियों के सम्मेलन एवं चोल, चेर, पांडय राज्यों के संस्कृति अध्ययन के संदर्भ में किया जाता है| सुदूर दक्षिण का इतिहास संगम इतिहास से ज्ञात होता है| उन तीन संगम पांडय राजाओं के संरक्षण में क्रमश: मदुरै (अध्यक्ष अगस्त ऋषि) , अलवे (अध्यक्ष-तोल्ल्कापिप्य्र ऋषि) एवं उ.मदुरै (अध्यक्ष नक्कीरर) आयोजित हुए|


इसका काल लगभग 200 ईसवी पूर्व से 300 ईसवी माना जाता है| संगम साहित्य के अनुसार 197 पांडय राजाओं में 8598 कवियों राजकीय संरक्षण दिया| इन दक्षिण राज्यों का सर्वप्रथम साहित्यक उल्लेख मेगस्थनीज में इंडिका ने किया है तथा अशोक ने अपने 13 शिलालेख में चोल, चेर, पांडय तीनों राज्यों का संगम स्थल था| Sangam Yug ka Itihaas.

Sangam Yug ka Itihaas

संगम युगीन राज्य विविध तथ्य

पांडव के संरक्षण में संपन्न संगम में सवार्धिक प्राचीन वंश चेर का सबसे अधिक उल्लेख मिलता है| तोल्काप्पियम द्वितीय संगम काल की रचना है, यह एक व्याकरण ग्रंथ है जिसमें आठ प्रकार के विवाह का वर्णन मिलता है| पुहार में अनेक यवन बस्तियों के साक्ष्य मिले हैं| संगम कालीन राज्य-चेर राज्य का प्रतीक चिन्ह धनुष था|
उदियन जेरल इस वंश का प्रथम शासक था| उसने महाभारत के युद्ध में भाग लेने वाले वीरों को भोजन कराया था| सेनगुटटूवन, इस वंश का महानतम शासक था| सेनगुटटूवन ने उत्तर भारत की चढ़ाई की और गंगा नदी को पार किया| तमिल महाकाव्य शीलप्पदिकाटम के अनुसार सेनगुटटूवन कोमाय्र की देवी का उपासना से संबंधित पतिरनी संपादक का संस्थापक था



संगम

अध्यक्ष

संरक्षण

स्थल

प्रथम

अगस्त्य पांडयशासक मदुरे
द्वितीय तोलकापिप्य् पांडयशासक

कपाटपुरम (अलेव)

द्वितीय

नक्कीरर पांडयशासक

उत्तरी मदुरा

चोल राज्य :- चोल वंश (दक्षिण भारत का) प्राचीनतम एवं सबसे लंबे समय तक शासन करने वाला वंश है| इनका प्रतीक चिन्ह बाघ था| चोलों की तटिय राजधानी पुहार (पतनम) थी| इसका सर्वप्रथम उल्लेख अशोक के 13वे शिलालेख में तथा मेगास्थनीज की इंडिका में हुआ| चोलों के दिध्रकालीन इतिहास के प्रथम भाग में 200 ईस्वी पूर्व से 800 ईसवी तक का इतिहास है| दूसरे भाग में 9वी शताब्दी (विजयालय) से राज राज, राजेंद्र-1 एवं राजेंद्र-iii तक (1250ई) का इतिहास शामिल है| चोलों प्रथम महान शासक करिकाल हुआ जो सात स्वरों का ज्ञान एवं वैदिक घमारनुयायी था| पेरुनरकिलिल नामक चोल शासक ने राज सूर्य यज्ञ किया था|

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पांडय राज्य :- पांडवों का सर्वप्रथम उल्लेख मेगस्थनीज ने किया| इनकी राजधानी मदुरै थी| मांडू का प्रतीक चिन्ह मछली था| पांडव शासक नेडीयोन ने समुंद्र पूजा का प्रचलन किया था| दक्षिण भारत में मुरुगन की उपासना की जाती थी, मुरुगन का नाम सुब्रह्मण्यम मिलता है, और स्कंद, कार्तिक से इस देवताओं का एकीकरण हो जाता है| मुकेश पांडे राज कला एवं संस्कृति का संरक्षण था


Sangam Yug gk Question in Hindi

  • एनाडी – सेन्य अधिकारी
  • वेनिगर – व्यापारी, वेल्लाल– किसान
  • मंडलम – राज्य
  • नाडु – (प्रांत) उर (नगर) पेरुर (बड़े गांव) मनोरम (स्थानीय सभा)
  • पुलेयम – रस्सी बुनने वाला
  • कडमई – राजा को दिया जाने वाला शुल्क- वरियम-उपज के आधार पर लिया जाने वाला कर
  • बेलि – भूमाप इकाई
  • केडीसिमर – खेतिहर मजदूर का कार्य करने वाला निम्न वर्ग
  • मुल्ले – चारागाह
  • उल्गु – सीमा शुल्क

अगर आप सभी को इतिहास यानि History से सम्बंधित किसी भी Topics पर जानकारी या Notes चाहिए तो आप हमें Comment करके बता सकते है| हमारी Expert टीम जल्द ही Provide करेगी !!!

से सम्बंधित नोट्स:-

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